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Social Cause Movies

Social Cause Movies: फ़िल्में हमारे जीवन में अहम भूमिका निभाती है, आये दिन ऐसी कई फ़िल्में आती है जो हमारे दिल पर ऐसी छाप छोडती है जिन्हें हम भूल नहीं सकते हैं। यह फ़िल्में समाज में परिवर्तन के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। फिल्मे वैसे तो मनोरंजन का साधन मानी जाती है पर अभी के समय में ऐसी कई फिल्मे भी परदे पर धूम मचाती है जो समाज के मुद्दों की ओर ध्यान खींचती है।

ये फिल्में महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को छूती हैं, साथ ही सामाजिक रूप से स्वीकार्य व्यवहार, नैतिकता सहित विभिन्न विषयों के बारे में बातचीत के लिए मंच भी प्रदान करती हैं।

आज हम बात करेंगें कुछ ऐसी फिल्मों की जिन्होंने समाज के परिवर्तन में मुख्य भूमिका निभाई है: (Social Cause Movies)

बुलबुल: BulBul

बुलबुल Netflix पर रिलीज हुई ऐसी फिल्म है जो समाज में फैली सबसे बड़ी कुरूति बाल विवाह की ओर ध्यान केन्द्रित करती है जो बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया है।

ओएमजी (ओ माय गॉड) : Oh my God

इस फिल्म में भगवान के प्रति अंधविश्वास को खूबसूरती से दर्शाया गया है, जहाँ कांजी नाम के एक व्यक्ति की दूकान भूकंप में दह जाती है और वो भगवन पर केस करता है और यही नहीं उसे कृष्णा का साक्षात्कार भी होता है जो कहानी को अलग मोड़ पर लेकर जाता है।

टॉयलेट एक प्रेम कथा: Toilet ek Prem katha

इस फिल्म में मुख्य भूमिका में अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर है। यह हमारे गाँवो की मुख्य समस्या टॉयलेट की उपलब्धता नहीं होने को दर्शाता है जिसमें भूमि का विवाह अक्षय कुमार से होता है पर दोनों के बीच एक ही जंग रहती है की खुले में शौच नहीं किया जाये और अक्षय भूमि के लिए घर में ही शौचालय बनवाए।

बधाई दो: Badhai Do

हमारे समाज में दो ही लिंग मान्यता प्राप्त माने जाते है, महिला और पुरुष पर इस फिल्म में होमोसेक्सुएलिटी पर बात की गयी है, जो एक नया विषय है और सभी लिंगों को अपनाने की और इशारा करता है।

डार्लिंग्स : Darlings

इस फिल्म में मुख्य भूमिका में आलिया भट्ट है। इसमें महिलाओं के साथ हो रहे घरेलू अत्याचार के बारे में बहुत ही अच्छे से बात की गयी है। आलिया भट्ट अपने पति के घरेलू उत्पीडन से बहुत ही अधिक परेशान होती है और अंत में उससे बदला लेती है। जिसे महिला उत्पीडन के खिलाफ आवाज उठाना कहा जाये तो गलत नहीं होगा।

पेडमेन (Padman) : (Social Cause Movies)

अक्षय कुमार काफी हद तक सामाजिक मुद्दों से जुडी फिल्मों के लिए जाने जाते है। जी हां, मासिक धर्म किसी भी महिला के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है पर उस दौरान अपने स्वास्थ्य का ख्याल कैसे रखा जाये साथ ही कपड़े की जगह पेड का उपयोग कैसे किया जाये, इस मुद्दे को दर्शाता है। यह फिल्म सच्ची कहानी से प्रेरित है। जिसमें एक पुरुष ने अपनी पत्नी के मासिक धर्म स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पेड का अविष्कार किया।

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